"HPGCL’s Former Finance Director

आईडीएफसी बैंक घोटाले में एचपीजीसीएल के पूर्व वित्त निदेशक बर्खास्त, दूसरे अधिकारी ने पूछताछ के डर से की आत्महत्या

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"HPGCL’s Former Finance Director

 हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले के आरोप में हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के पूर्व वित्त निदेशक अमित दीवान को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। आरोप है कि दीवान ने उक्त बैंकों में खाते खोलने के दौरान 50 करोड़ के लेनदेन में कथित तौर पर 50 लाख रुपये की अवैध रिश्वत ली है।                                                                                                                                                          
दीवान को 'उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम कर्मचारी (दंड और अपील) विनियम, 2018' के नियम 7 (ए) से जुड़े प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए बर्खास्त कर दिया गया। हरियाणा के राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 23 फरवरी को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। घोटाले की जड़ें गहरी होने के कारण 8 अप्रैल को यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। इस घोटाले में बड़े पैमाने पर और कई स्तरों वाला वित्तीय धोखाधड़ी शामिल थी, जिसमें सरकारी प्रक्रियाओं में हेरफेर, फर्जी बैंकिंग गतिविधियां और काल्पनिक वित्तीय लेन-देन करके हरियाणा सरकार के फंड को आरोपी द्वारा नियंत्रित फर्जी संस्थाओं और खातों में ट्रांसफर किया गया था। यह घोटाला 590 करोड़ रुपये का है, क्योंकि इसमें हरियाणा सरकार के कई विभागों के खाते शामिल हैं। दीवान चौथे ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें बर्खास्त किया गया है।                                                                                                                                     इससे पहले, 30 अप्रैल को, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के वित्त और लेखा नियंत्रक राजेश सांगवान को 10 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप में बर्खास्त किया गया था। उन पर आरोप था कि वे सह-आरोपी के लगातार संपर्क में थे और आईडीएफसी फस्र्ट बैंक में खाता खुलवाने में उनकी कथित तौर पर अहम भूमिका थी। 23 अप्रैल को विकास और पंचायत विभाग के अधीक्षक नरेश कुमार को सह-आरोपी से कथित तौर पर 6.55 करोड़ रुपये और एक लग्जरी कार लेने, और कथित तौर पर मोहाली में अपनी पत्नी के नाम पर एक घर खरीदने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था। इसके अलावा, शिक्षा विभाग के मुख्य लेखा अधिकारी रणधीर सिंह को 24 अप्रैल को 54 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप में बर्खास्त किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने न केवल नकद के रूप में, बल्कि चंडीगढ़ से गोवा की यात्रा के लिए अपने और परिवार के पांच अन्य सदस्यों के लिए हवाई टिकट जैसी अन्य सुविधाओं के रूप में भी अवैध रिश्वत ली थी। इन चारों को बिना किसी विभागीय जांच के बर्खास्त कर दिया गया।

वहीं, आईडीएफसी बैंक घोटाले के एक आरोपी सरकारी कर्मचारी ने सोमवार को चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय की आठवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। आरोपी सीबीआई के रॉडार पर था। मृतक की पहचान पंचकूला निवासी बलवंत सिंह के रूप में हुई है। मृतक हरियाणा बिजली उत्पादन निगम लिमिटेड (एचपीजीसीएल) में अकाउंट ऑफिसर थे। सोमवार को वह विजिटर पास बनवाकर सचिवालय के अंदर दाखिल हुए। पास सुबह 9:42 बजे बना और 10:22 बजे उनकी एंट्री दर्ज हुई।
सीसीटीवी फुटेज के अनुसार वह पांचवीं मंजिल पर एक अधिकारी से मिलने आए थे, लेकिन कुछ ही देर में वे 8वीं मंजिल पर पहुंचे और वहीं से कूदकर जान दे दी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि वह पांचवीं मंजिल का काम बताकर आठवीं मंजिल पर कैसे पहुंचे और अचानक ऐसा क्या हुआ कि उसने आत्महत्या कर ली।
घटना के तुरंत बाद पुलिस और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और परिवार को सूचित कर दिया गया है। सचिवालय जैसे हाई-सिक्योरिटी जोन में हुई इस घटना ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बैंक फ्रॉड मामले की जांच पहले ही सीबीआई को सौंप चुके हैं। 590 करोड़ के इस कथित घोटाले में दो आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है। बलवंत सिंह के खिलाफ भी पहली मई को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मंजूरी दी गई थी। ऐसे में घटना ने जांच के दायरे और भी व्यापक कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, बलवंत सिंह का नाम आईडीएफसी फस्र्ट के करीब 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड केस में सामने आया था। बताया जाता है कि बीती एक मई को हरियाणा सरकार ने बलवंत सिंह के खिलाफ 17 ए के तहत कार्रवाई की मंजूरी दी थी। इस पूरे मामले की जांच सीबीआई कर रही है। बताया जा रहा है कि वे पहले भी जांच में शामिल हो चुके थे और सोमवार को ही उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया था। यही वजह है कि इस मौत को सीधे-सीधे चल रही जांच से जोडकऱ देखा जा रहा है।
इससे पहले, इसी साल 25 फरवरी को हरियाणा सचिवालय की ही छठी मंजिल से कूदकर एक कर्मचारी ने सुसाइड किया था। मृतक की पहचान गणेश दास अरोड़ा के तौर पर हुई। वे आईएएस अफसर हितेश कुमार मीणा के स्पेशल सीनियर सेक्रेटरी थे।